सिवनी | जिले में बहने वाली जीवनदायिनी मां बैनगंगा नदी आज गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। शहर और आसपास के क्षेत्रों से निकलने वाला गंदा पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नदी में मिल रहा है, जिससे नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, डूंडा सिवनी से लेकर खैरी टेक तक का गंदा पानी बड़ापुल नाले के जरिए नागपुर रोड होते हुए लखनवाड़ा स्थित बैनगंगा नदी में पहुंच रहा है। इसी तरह बस स्टैंड और हड़ीगोदाम क्षेत्र का गंदा पानी परतापुर के गोसाई बाबा घाट में गिरता है। वहीं बारापत्थर भैरोगंज का दूषित पानी मुगवानी रोड के नाले से होकर शांतिधाम, परतापुर के पास नदी में मिल रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पेंच बांध का पानी आने के बाद भले ही नदी का पानी साफ दिखाई देता हो, लेकिन हकीकत में प्रदूषण पहले से ज्यादा बढ़ गया है। यह दूषित पानी आगे छपारा होते हुए भीमगढ़ बांध में पहुंचता है, जहां से फिल्टर कर सिवनी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के रूप में सप्लाई किया जाता है।
चिंता की बात यह है कि लखनवाड़ा और परतापुर जैसे प्रमुख स्थानों पर नालों के लिए कोई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है। इससे न केवल ग्रामीणों के दैनिक जीवन पर असर पड़ रहा है, बल्कि पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही कलेक्टर श्रीमती शीतला पटले और सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन से भी अपील की गई है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएं और जल्द समाधान सुनिश्चित करें।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गंदे नालों पर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित कर दिए जाएं, तो बैनगंगा नदी को प्रदूषण से बचाया जा सकता है। इससे सिवनी शहर सहित लाखों ग्रामीणों को स्वच्छ जल मिलेगा और उनका जीवन बेहतर हो सकेगा।
नागरिकों ने भरोसा जताया है कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर जल्द ठोस कदम उठाएंगे। साथ ही आमजन भी इस पहल में प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने को तैयार हैं।


