सिवनी। मध्य प्रदेश के सिवनी-बालाघाट मार्ग की जर्जर हालत और लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के विरोध में बरघाट नगर पूरी तरह बंद रहा। “मौत की सड़क” के नाम से कुख्यात इस मार्ग के खिलाफ बुलाया गया यह बंद आंदोलन पूरी तरह सफल साबित हुआ।
युवा विचार मंच के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक छोटे-बड़े सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। नगरवासियों की यह एकजुटता प्रशासन के प्रति गहरी नाराजगी को दर्शाती है।
आंदोलन की सबसे अहम बात यह रही कि भाजपा नेताओं ने भी खुलकर इसका समर्थन किया। कई वरिष्ठ पदाधिकारी, सांसद प्रतिनिधि और पूर्व मंडल अध्यक्ष न केवल आंदोलन में शामिल हुए, बल्कि अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर जनता के साथ खड़े नजर आए। यह समर्थन ऐसे समय में आया है जब अप्रैल में सड़क निर्माण के भूमिपूजन की तैयारियां भी चल रही हैं।
प्रदर्शन के दौरान बरघाट नगर परिषद से तहसील कार्यालय तक एक विशाल रैली निकाली गई। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें प्रमुख मांगों में सड़क का शीघ्र फोरलेन निर्माण, टोल टैक्स बंद करना, दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और मजबूत सड़क सुरक्षा व्यवस्था शामिल हैं।
गौरतलब है कि लंबे समय से इस मार्ग की खराब स्थिति के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। एम्बुलेंस सेवाओं में देरी और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में कठिनाइयों ने स्थिति को और चिंताजनक बना दिया है।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी और आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। अब यह विरोध एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है और “मौत की सड़क” के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है।





