मध्यप्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) और प्रधानमंत्री आवास योजना के भुगतान में देरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। कर्मचारियों, मजदूरों और हितग्राहियों के भुगतान लंबित होने का मुद्दा अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है।
📉 क्या है मामला?
- मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों को 5–7 महीनों से वेतन नहीं मिलने का दावा
- मजदूरों को जनवरी से मजदूरी भुगतान लंबित बताया जा रहा
- प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों की दूसरी किश्त भी 6–8 महीने से अटकी
😟 कर्मचारियों और मजदूरों की स्थिति
- रोजगार सहायक और अन्य कर्मचारी आर्थिक संकट से जूझ रहे
- बैंक ऋण, बच्चों की पढ़ाई और दवाइयों का खर्च उठाना मुश्किल
- मजदूरों की आजीविका पर सीधा असर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित
⚖️ नियम क्या कहते हैं?
- मनरेगा के तहत 15 दिनों में मजदूरी भुगतान अनिवार्य
- देरी होने पर मुआवजा देने का प्रावधान
- भुगतान में लगातार देरी से व्यवस्था पर सवाल
🏛️ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
- मोहन यादव सरकार पर असंवेदनशीलता के आरोप
- कांग्रेस ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए
- केंद्र और राज्य सरकारों पर योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही का आरोप
📢 मुख्य मांगें
- लंबित वेतन और मजदूरी का तत्काल भुगतान
- देरी के लिए मुआवजा दिया जाए
- भविष्य में समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था
- प्रधानमंत्री आवास योजना की रुकी किश्त जल्द जारी हो
🚨 आंदोलन की चेतावनी
- मांगें पूरी न होने पर कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे सड़क से सदन तक उठाने की चेतावनी
- कर्मचारियों और मजदूरों के साथ मिलकर बड़े आंदोलन की बात

यह मामला अब केवल भुगतान का नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका और सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है।


